इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
जयधवला टीका’ दिगंबर जैन परंपरा के सबसे विशाल और महत्वपूर्ण टीका-ग्रंथों में से एक है। यह आचार्य वीरसेन और उनके शिष्य जिनसेन द्वारा ‘कसायपाहुड’ नामक आगम ग्रंथ पर लिखी गई है। यह टीका कर्म-सिद्धांत की अत्यंत सूक्ष्म और गहन व्याख्या प्रस्तुत करती है। अपनी विशालता और दार्शनिक गहराई के कारण यह जैन सिद्धांत का एक विश्वकोश मानी जाती है और यह केवल प्रकांड विद्वानों के अध्ययन का विषय है।
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