इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
श्रीमद्भागवत संत भद्राचार्य द्वारा रचित ‘जिनशतकं सटीकम’ एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र काव्य है, जिसमें ‘जिन’ अर्थात तीर्थंकरों की स्तुति की गई है। ‘शतक’ का अर्थ है सौ श्लोक, और यह कृति सौ श्लोकों के माध्यम से जिनेन्द्र भगवान के गुणों, उनके उपदेशों और उनके प्रति असीम भक्ति को प्रकट करती है। ‘सटीकम’ का अर्थ है कि यह टीका या व्याख्या सहित है, जिससे मूल श्लोकों के गहरे अर्थ को समझने में आसानी होती है। यह पुस्तक जैन भक्ति साहित्य की एक अनुपम रचना है, जो काव्यात्मक सौंदर्य और आध्यात्मिक चिंतन का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करती है।
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