इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह एक प्राचीन और महत्वपूर्ण संस्कृत व्याकरणिक ग्रंथ है। “काशकृत्स्न-धातुव्याख्यानम्” का अर्थ है “काशकृत्स्न द्वारा धातुओं की व्याख्या”। काशकृत्स्न को पाणिनि से भी पूर्व का एक महान वैयाकरण माना जाता है। यह ग्रंथ संस्कृत भाषा की क्रियाओं के मूल रूपों, यानी ‘धातुओं’, पर केंद्रित है। इसमें विभिन्न धातुओं के अर्थ, उनके गण (classification), और उनसे बनने वाले रूपों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है। यद्यपि काशकृत्स्न का मूल व्याकरण ग्रंथ पूरी तरह उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह कृति, जो संभवतः उसी परंपरा पर आधारित है, संस्कृत व्याकरण के ऐतिहासिक विकास और धातुपाठ के अध्ययन के लिए विद्वानों हेतु एक अमूल्य संसाधन है।
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