इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“कल्पपञ्चकप्रयोग:” तंत्र-शास्त्र से संबंधित एक विशिष्ट साधना-पद्धति का ग्रंथ है। ‘कल्प’ का अर्थ है अनुष्ठान या विधि-विधान, और ‘पंचक’ का अर्थ है पांच। यह पुस्तक संभवतः किसी देवता या देवी से संबंधित पांच-स्तरीय अनुष्ठान या पांच विभिन्न प्रकार के कल्पों के प्रयोगात्मक विवरण को प्रस्तुत करती है। इसमें साधना के लिए आवश्यक सामग्री, मंत्र, मंडल (यंत्र) और उनकी क्रियाओं का विस्तृत और क्रमबद्ध निर्देश दिया गया होगा। यह एक अत्यंत गूढ़ और तकनीकी ग्रंथ है, जो केवल दीक्षित और योग्य साधकों के लिए अभिप्रेत है, ताकि वे तंत्र-अनुष्ठान को सही विधि से संपन्न कर सकें।
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