इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“कंचन मृग” (सोने का हिरण) शीर्षक रामायण के उस प्रसिद्ध प्रसंग की ओर संकेत करता है जहाँ मारीच नामक राक्षस सीता को हरने की योजना के तहत एक सुंदर सोने के हिरण का रूप धारण करता है। यह पुस्तक या तो उस पौराणिक कथा का विस्तृत और काव्यात्मक पुनर्कथन हो सकती है, या फिर यह शीर्षक एक साहित्यिक प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया होगा। एक उपन्यास या कहानी संग्रह के रूप में, ‘कंचन मृग’ उन भ्रामक इच्छाओं, लालच और मोह का प्रतीक हो सकता है, जिनके पीछे भागकर व्यक्ति अपने वास्तविक सुख और सुरक्षा को खो देता है। यह कृति मानवीय कमजोरियों और उनके विनाशकारी परिणामों पर एक मार्मिक टिप्पणी हो सकती है।
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