इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
कर्मनाशा की हार’ शिवप्रसाद सिंह द्वारा लिखी गई एक प्रसिद्ध कहानी है। यह कहानी ग्रामीण भारत के अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों पर एक शक्तिशाली प्रहार है। कहानी कर्मनाशा नदी के किनारे बसे एक गाँव की है, जहाँ यह अंधविश्वास प्रचलित है कि नदी में बाढ़ आने पर किसी की बलि देने से ही वह शांत होती है। जब एक युवा विधवा और उसके प्रेमी को इस कुप्रथा का शिकार बनाने की कोशिश की जाती है, तो गाँव का एक प्रगतिशील पात्र इसके खिलाफ खड़ा होता है। यह कहानी प्रेम, मानवीयता और तर्क की उस अंधविश्वास पर विजय को दर्शाती है, जो समाज को जकड़े हुए है।
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