इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“कविता के पक्ष” शीर्षक वाली यह पुस्तक संभवतः कविता की कला और उसके विभिन्न पहलुओं पर एक आलोचनात्मक या वैचारिक कृति है। इसमें लेखक ने कविता के समर्थन में (‘पक्ष में’) तर्क प्रस्तुत किए होंगे और यह बताया होगा कि आधुनिक, गद्य-प्रधान युग में भी कविता क्यों प्रासंगिक और आवश्यक है। पुस्तक में कविता की परिभाषा, उसके तत्व (जैसे- भाव, कल्पना, लय), और समाज में उसकी भूमिका पर निबंध हो सकते हैं। यह विभिन्न काव्य-आंदोलनों और विचारधाराओं का विश्लेषण भी कर सकती है। यह कवियों, आलोचकों, और कविता-प्रेमी पाठकों के लिए एक विचारोत्तेजक पुस्तक है, जो कविता को समझने का एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है।
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