इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक शोध-ग्रंथ है जो अष्टछाप के प्रमुख कवियों में से एक, ‘परमानन्ददास’ और उनके दार्शनिक आधार ‘वल्लभ संप्रदाय’ (पुष्टिमार्ग) का गहन अध्ययन करता है। इस कृति में परमानन्ददास के पदों के काव्य-सौंदर्य, उनकी कृष्ण-भक्ति और उनके काव्य पर पुष्टिमार्गीय दर्शन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह सूरदास के अतिरिक्त अष्टछाप के अन्य महत्वपूर्ण कवियों को समझने के लिए हिंदी साहित्य के अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण पुस्तक है।
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