इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“काव्यमाला” एक प्रसिद्ध ग्रंथमाला (series) का नाम है, जिसके अंतर्गत विभिन्न संस्कृत और प्राकृत काव्यों को संपादित कर प्रकाशित किया जाता था। यह उस ग्रंथमाला का छठा भाग है। निर्णय सागर प्रेस, मुंबई द्वारा प्रकाशित यह श्रृंखला विद्वानों के बीच अत्यंत प्रतिष्ठित थी। इस छठे भाग में किसी एक या अधिक दुर्लभ या महत्वपूर्ण काव्यों का मूल पाठ, संभवतः एक परिचय और पाठ-समीक्षा के साथ, शामिल होगा। इसका उद्देश्य उन साहित्यिक कृतियों को संरक्षित करना और उन्हें अध्येताओं तथा शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाना था जो अन्यथा पांडुलिपियों तक ही सीमित रह जातीं। यह भारतीय काव्य-परंपरा के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण योगदान है।
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