इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
काव्यानुशासनम्’ आचार्य हेमचंद्र द्वारा रचित संस्कृत काव्यशास्त्र का एक महत्त्वपूर्ण और व्यापक ग्रंथ है। बारहवीं शताब्दी के इस जैन विद्वान ने अपने इस कृति में काव्य के सभी प्रमुख अंगों—काव्य के कारण, लक्षण, गुण, दोष, अलंकार, रस और ध्वनि—का व्यवस्थित और विस्तृत विवेचन किया है। यह ग्रंथ पूर्ववर्ती आचार्यों जैसे भरत, भामह, दण्डी, और आनंदवर्धन के मतों का समन्वय करते हुए एक सुसंगत काव्यशास्त्रीय सिद्धांत प्रस्तुत करता है। अपनी व्यवस्थित संरचना और व्यापक विषय-वस्तु के कारण, ‘काव्यानुशासनम्’ संस्कृत साहित्य के छात्रों और विद्वानों के लिए एक अनिवार्य संदर्भ ग्रंथ माना जाता है।
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