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ललनोद्वाहपद्यावली ललन सागर भाग - 26 - Lalanodvaha Paddhawali Lalan Sagar Part-26 - Book
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ललनोद्वाहपद्यावली ललन सागर भाग – 26 – Lalanodvaha Paddhawali Lalan Sagar Part-26 – Book

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इस पुस्तक के विषय

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पुस्तक सार

यह कृति ‘ललन सागर’ नामक एक विशाल ग्रंथ श्रृंखला का 26वां भाग है, जिसमें ‘ललनोद्वाहपद्यावली’ शामिल है। ‘ललन’ संभवतः कृष्ण या किसी अन्य देवता का एक प्रेमपूर्ण संबोधन है, और ‘उद्वाह’ का अर्थ विवाह है। ‘पद्यावली’ का अर्थ है कविताओं की श्रृंखला। इस प्रकार, यह पुस्तक भगवान कृष्ण के विवाह प्रसंगों, विशेष रूप से रुक्मिणी या अन्य रानियों के साथ उनके विवाह, पर केंद्रित काव्य रचनाओं का संग्रह हो सकती है। यह भक्ति साहित्य का एक हिस्सा है, जिसमें शृंगार और भक्ति रस का सुंदर संगम देखने को मिलता है। यह कृष्ण-भक्तों के लिए एक आनंददायक और आध्यात्मिक रूप से édifiant पाठ है।

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