इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“महापुराण” जैन धर्म, विशेषकर दिगंबर परंपरा, का एक विशाल और प्रतिष्ठित ग्रंथ है। इसकी रचना आचार्य जिनसेन और उनके शिष्य गुणभद्र ने 9वीं शताब्दी में की थी। यह ग्रंथ 63 शलाकापुरुषों (24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 बलभद्र, 9 नारायण और 9 प्रतिनारायण) के जीवन-चरित्र का वर्णन करता है। यह प्रथम भाग संभवतः ‘आदिपर्व’ है, जिसमें प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जीवन का विस्तृत वर्णन है। यह केवल एक चरित-काव्य नहीं, बल्कि इसमें जैन दर्शन, आचार-विचार, और ब्रह्मांड-विज्ञान का भी व्यापक समावेश है। यह जैन परंपरा के लिए एक विश्वकोश की तरह है।
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