इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“मन्दस्मितशतकम्” का अर्थ है “मंद मुस्कान पर सौ श्लोकों का संग्रह”। यह एक अनूठा और श्रृंगारिक संस्कृत मुक्तक काव्य है। इस कृति में कवि ने नायिका की मंद-मंद मुस्कान के सौंदर्य, उसके विभिन्न प्रकारों, और नायक के हृदय पर पड़ने वाले उसके प्रभावों का सौ श्लोकों में अत्यंत सूक्ष्म और काव्यात्मक वर्णन किया है। यह काव्य श्रृंगार रस की गहराई और मानवीय भावों के सूक्ष्म चित्रण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाता है कि संस्कृत कवियों की दृष्टि कितनी पारखी थी कि वे मुस्कान जैसे एक छोटे से विषय पर भी एक संपूर्ण ‘शतक-काव्य’ की रचना कर सकते थे। यह प्रेम और सौंदर्य का एक ललित उत्सव है।
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