इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह पुस्तक दस महाविद्याओं में से एक, देवी मातंगी की साधना और उनके तांत्रिक स्वरूप पर केंद्रित है। देवी मातंगी को उच्छिष्ट चांडालिनी के नाम से भी जाना जाता है और वे वाणी, संगीत, कला और ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। इस कृति में मातंगी देवी के ध्यान मंत्र, पूजा विधि, यंत्र निर्माण और उनके विभिन्न स्तोत्रों का वर्णन किया गया है। यह उनके उग्र और सौम्य दोनों रूपों के पीछे के गूढ़ दार्शनिक रहस्यों को समझाती है। यह तंत्र साधना के उन साधकों के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है जो महाविद्या मातंगी की कृपा प्राप्त कर वाक्-सिद्धि और सभी कलाओं में निपुणता प्राप्त करना चाहते हैं।
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