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मिट्टी का कलंक - Mitti Ka Kalank - Book
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मिट्टी का कलंक – Mitti Ka Kalank – Book

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पुस्तक सार

“मिट्टी का कलंक” शीर्षक एक गहरे सामाजिक या व्यक्तिगत मुद्दे पर आधारित उपन्यास या कहानी संग्रह की ओर संकेत करता है। ‘मिट्टी’ यहाँ मनुष्य के अस्तित्व, उसकी जड़ों या समाज से जुड़ी है, जबकि ‘कलंक’ किसी अपमान, दोष या ऐसी घटना को दर्शाता है जिसने उस अस्तित्व पर दाग लगा दिया हो। यह कहानी किसी पात्र के जीवन के उस संघर्ष को चित्रित कर सकती है जो किसी सामाजिक कुरीति, अन्याय या व्यक्तिगत गलती के कारण उत्पन्न हुआ है। इसमें शायद चरित्र के आत्म-सम्मान की लड़ाई, समाज द्वारा उसके बहिष्कार और उस कलंक को मिटाने या उसके साथ जीने की जद्दोजहद का मार्मिक वर्णन है। यह मानवीय कमजोरियों और सामाजिक दबावों का एक यथार्थवादी चित्रण हो सकता है।

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