इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
मुकुंदमाला’ दक्षिण भारत के वैष्णव संत और राजा कुलशेखर आल्वार द्वारा रचित भगवान विष्णु (मुकुंद) की स्तुति में एक सुंदर संस्कृत स्तोत्र है। इस स्तोत्र-काव्य में लगभग चालीस छंद हैं, जिनमें कवि ने भगवान के प्रति अपनी अनन्य भक्ति, उनके चरणों में शरण लेने की तीव्र इच्छा, और सांसारिक जीवन की निरर्थकता को व्यक्त किया है। ‘मुकुंदमाला’ की भाषा सरल, भावपूर्ण और संगीतमय है, जो इसे वैष्णव भक्तों के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाती है। यह भक्ति साहित्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो पाठक के हृदय में कृष्ण-प्रेम को जाग्रत करता है।
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