इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
नलोदयः’ कालिदास द्वारा रचित माना जाने वाला एक छोटा संस्कृत महाकाव्य है, जिसमें महाभारत के प्रसिद्ध नल-दमयंती आख्यान का वर्णन है। यह कृति अपनी जटिल शब्द-क्रीड़ा, यमक अलंकार के प्रचुर प्रयोग और कठिन काव्य शैली के लिए जानी जाती है। ‘प्रथमः सर्ग:’ इस महाकाव्य के पहले अध्याय को प्रस्तुत करता है, जिसमें संभवतः नल के गुणों, दमयंती के सौंदर्य और दोनों के बीच हंस के माध्यम से संदेशों के आदान-प्रदान का काव्यात्मक वर्णन किया गया होगा। यह संस्कृत काव्य की उन्नत तकनीकों और कालिदास की भाषा पर असाधारण पकड़ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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