इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक जैन धर्म के महामंत्र ‘णमोकार मंत्र’ (जिसे नमस्कार मंत्र भी कहते हैं) पर ‘स्वाध्याय’ अर्थात आत्म-अध्ययन के लिए एक मार्गदर्शिका है। इसमें इस मंत्र के प्रत्येक पद का अर्थ, उसकी महिमा, और उसके ध्यान की विधि को समझाया गया है। इसका उद्देश्य साधक को केवल मंत्र का जाप करने के बजाय, उसके गहरे अर्थों का चिंतन और मनन करने के लिए प्रेरित करना है, ताकि वह उसके आध्यात्मिक लाभों को पूरी तरह से प्राप्त कर सके।
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