इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“नानार्थसंग्रहः” अजयपाल द्वारा रचित एक ‘नानार्थक’ या ‘अनेकार्थक’ संस्कृत कोश है। इस प्रकार के कोशों की विशेषता यह होती है कि इनमें उन शब्दों को संग्रहित किया जाता है जिनके एक से अधिक अर्थ होते हैं (homonyms)। यह कोश पद्य-रूप में है और इसमें प्रत्येक शब्द के विभिन्न अर्थों को एक ही श्लोक में पिरोया गया है, जिससे उन्हें याद करना आसान हो जाता है। यह संस्कृत के कवियों और विद्वानों के लिए एक अत्यंत उपयोगी उपकरण था, क्योंकि यह उन्हें ‘श्लेष’ जैसे अलंकारों का प्रयोग करने और काव्य में अर्थ की गहराई लाने में मदद करता था। यह संस्कृत कोश-परंपरा का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
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