इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
नाटकचन्द्रिका’ संस्कृत नाट्यशास्त्र पर एक ग्रंथ है। ‘चन्द्रिका’ का अर्थ है ‘चांदनी’, जो यह दर्शाता है कि यह कृति नाटक कला के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है। यह भरत मुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ पर आधारित एक टीका या एक स्वतंत्र ग्रंथ हो सकता है। इसमें नाटक के तत्त्वों, जैसे कथावस्तु, नायक-नायिका के भेद, रस-निष्पत्ति, और विभिन्न प्रकार के रूपकों (नाटकों) के लक्षणों का विस्तृत विवेचन किया गया होगा। यह संस्कृत नाटक के छात्रों और निर्देशकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण मार्गदर्शिका है, जो उन्हें नाट्य कला के शास्त्रीय नियमों को समझने में मदद करती है।
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