इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित यह पुस्तक भरतमुनि के ‘नाट्यशास्त्र’ से आरंभ होने वाली ‘भारतीय नाट्य परंपरा’ का एक ऐतिहासिक और आलोचनात्मक अध्ययन है। इसमें संस्कृत नाटकों से लेकर लोक-नाट्यों तक के विकास, उनके शास्त्रीय सिद्धांतों, और भारतीय संस्कृति में नाटक के महत्व का गहन विवेचन है। द्विवेदी जी की यह कृति भारतीय रंगमंच की समृद्ध विरासत को उसकी समग्रता में समझने के लिए एक विद्वत्तापूर्ण और प्रामाणिक ग्रंथ है।
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