इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
देवगुप्ता सूरी द्वारा रचित यह ग्रंथ ‘नवपद’ या ‘सिद्धचक्र’ की पूजा और उसके महत्व पर केंद्रित है। ‘नवपद’ में अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक् दर्शन, ज्ञान, चारित्र और तप, इन नौ पदों की आराधना की जाती है। ‘स्वोपज्ञ लघुवृत्ति’ का अर्थ है कि रचयिता ने स्वयं ही इस पर एक संक्षिप्त टीका (वृत्ति) भी लिखी है। यह कृति इन नौ पदों के आध्यात्मिक अर्थ और उनकी आराधना की विधि को समझाती है। यह जैन धर्म की एक महत्वपूर्ण साधना पद्धति का प्रामाणिक परिचय देती है।
फ़ॉर्मेट बदलना
क्या आपको यह फ़ाइल किसी दूसरे फ़ॉर्मेट में चाहिए? इसके लिए आप iLovePDF का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो एक बहुत अच्छा ऑनलाइन टूल है।
ई-रीडर पर भेजें
आप Amazon की “Send to Kindle” जैसी फ्री सर्विस का इस्तेमाल करके आसानी से फ़ाइल को अपने डिवाइस पर भेज सकते हैं।
कोई दिक्कत आ रही है?
चेक करें कि आपके ई-रीडर का सॉफ्टवेयर अपडेटेड है। यदि फ़ाइल खराब हो या न खुले, तो कृपया उसे पुनः डाउनलोड करें। फिर भी समस्या हो तो हमसे संपर्क करें।