इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
आचार्य रविषेण द्वारा रचित ‘पद्मपुराण’ जैन परंपरा का एक विशाल और महत्वपूर्ण पुराण ग्रंथ है। यह मुख्य रूप से जैन दृष्टिकोण से भगवान राम (जिन्हें ‘पद्म’ भी कहा जाता है) के जीवन का वर्णन करता है। यह वाल्मीकि रामायण से कई मामलों में भिन्न है और जैन धर्म के सिद्धांतों, जैसे अहिंसा और कर्म, पर जोर देता है। दूसरा खंड कथा को आगे बढ़ाता है, जिसमें सीता, रावण और अन्य पात्रों का जैन परिप्रेक्ष्य में चरित्र-चित्रण किया गया है। यह जैन साहित्य और रामायण परंपरा के तुलनात्मक अध्ययन के लिए एक आवश्यक ग्रंथ है।
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