इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“पाटुकापञ्चकम्” गुरु की पादुकाओं (चरण-पादुकाओं) की महिमा का गुणगान करने वाला पाँच श्लोकों का एक स्तोत्र है। यह स्तोत्र तंत्र शास्त्र, विशेष रूप से शैव और शाक्त परंपराओं में, अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें गुरु की पादुकाओं को केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि स्वयं शिव-शक्ति का स्वरूप माना गया है, जो साधक को अज्ञान के अंधकार से निकालकर मोक्ष प्रदान करती हैं। यह कृति इन पांच श्लोकों का मूल पाठ, उनका अनुवाद और उनकी गूढ़ तांत्रिक व्याख्या प्रस्तुत करती है। यह गुरु-शिष्य परंपरा की महिमा और गुरु के चरणों में पूर्ण समर्पण के महत्व को दर्शाने वाला एक छोटा किन्तु शक्तिशाली ग्रंथ है।
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