इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“पराशर-स्मृति” हिंदू धर्मशास्त्र के स्मृति साहित्य का एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसके रचयिता महर्षि पराशर माने जाते हैं। इस स्मृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे विशेष रूप से ‘कलियुग’ के लिए प्रासंगिक माना गया है। इसमें यह तर्क दिया गया है कि सतयुग, त्रेता और द्वापर के कठोर नियम कलियुग के मनुष्यों के लिए पालन करना संभव नहीं है, इसलिए इस युग के लिए अलग धर्म (नियम) होने चाहिए। इसमें मुख्य रूप से आचार (आचरण), प्रायश्चित और व्यवहार (कानून) के नियमों की विवेचना है। यह हिंदू धर्म की परिवर्तनशील और युग-सापेक्ष प्रकृति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
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