इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
पर्व’ एस. एल. भैरप्पा द्वारा कन्नड़ में लिखा गया एक कालजयी उपन्यास है, जिसका कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है। यह महाभारत की कथा का एक यथार्थवादी और मनोवैज्ञानिक पुनर्कथन है। भैरप्पा पात्रों को दैवीय शक्तियों से युक्त महामानवों के रूप में नहीं, बल्कि सामान्य मनुष्यों के रूप में चित्रित करते हैं, जो अपनी महत्त्वाकांक्षाओं, कमजोरियों और नैतिक दुविधाओं से जूझते हैं। यह उपन्यास युद्ध की निरर्थकता, सत्ता के संघर्ष, और मानवीय रिश्तों की जटिलताओं पर एक शक्तिशाली टिप्पणी है, जो महाभारत को एक आधुनिक और तार्किक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करता है।
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