इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
प्राकृत-मार्ग-उपदेशिका’ का अर्थ है ‘प्राकृत भाषा के मार्ग का उपदेश देने वाली’। यह प्राकृत भाषा सीखने के लिए एक परिचयात्मक मार्गदर्शिका या पाठ्यपुस्तक है। इसमें प्राकृत भाषा के व्याकरण, उसकी संरचना और वाक्य-विन्यास के नियमों को सरल और व्यवस्थित तरीके से समझाया गया है। यह उन छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए एक आवश्यक उपकरण है जो प्राचीन जैन आगमों और अन्य प्राकृत साहित्य का मूल भाषा में अध्ययन करना चाहते हैं।
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