इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
जगन्नाथ प्रसाद शर्मा द्वारा लिखित यह पुस्तक छायावाद के प्रमुख स्तंभ जयशंकर प्रसाद के नाटकों का भारतीय काव्यशास्त्र और नाट्यशास्त्र के मानदंडों पर एक गहन अध्ययन प्रस्तुत करती है। इसमें प्रसाद के प्रसिद्ध नाटकों जैसे ‘स्कंदगुप्त’, ‘चंद्रगुप्त’, और ‘ध्रुवस्वामिनी’ का विश्लेषण रस, चरित्र-चित्रण, कथानक, और नाट्य-शिल्प की दृष्टि से किया गया है। लेखक ने यह दर्शाया है कि कैसे प्रसाद ने अपने नाटकों में भारतीय शास्त्रीय परंपरा को अपनाते हुए भी उसे एक आधुनिक और राष्ट्रीय संदर्भ प्रदान किया। यह हिंदी आलोचना की एक महत्वपूर्ण कृति है।
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