इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह 17वीं सदी के महान वैयाकरण भट्टोजी दीक्षित द्वारा रचित एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उन्नत संस्कृत व्याकरण का ग्रंथ है। यह उनकी अपनी कृति ‘सिद्धान्तकौमुदी’ पर लिखी गई एक विस्तृत और गहन टीका है। ‘प्रौढमनोरमा’ का अर्थ है ‘विद्वानों का मनोरंजन करने वाली’। यह पाणिनीय व्याकरण के सबसे जटिल और विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा करती है और इसे संस्कृत व्याकरण के उच्चतम अध्ययनों में से एक माना जाता है।
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