इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
रेल का टिकट’ अमृता प्रीतम की प्रसिद्ध आत्मकथा है। यह शीर्षक उनके जीवन की यात्रा का एक शक्तिशाली रूपक है, जिसमें वे कहती हैं कि उन्होंने अपने जीवन के लिए कोई वापसी का टिकट नहीं खरीदा। इस कृति में, वह अपने व्यक्तिगत जीवन, विशेष रूप से साहिर लुधियानवी और इमरोज़ के साथ अपने संबंधों, अपने साहित्यिक जीवन, और भारत के विभाजन की त्रासदी पर अपने अनुभवों को बड़ी बेबाकी और ईमानदारी से प्रस्तुत करती हैं। यह एक महिला के स्वतंत्र और साहसी जीवन का एक मार्मिक दस्तावेज़ है।
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