इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पुस्तक मध्यकालीन भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख वैष्णव संप्रदाय, ‘रामानंद संप्रदाय’ का एक गहन और विद्वत्तापूर्ण अध्ययन है। इसमें इस संप्रदाय के संस्थापक स्वामी रामानंद, उनकी शिक्षाओं, और उनके द्वारा प्रचारित सामाजिक समानता और भक्ति के संदेश का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह कृति कबीर और तुलसीदास जैसे महान संतों पर रामानंद के प्रभाव की भी पड़ताल करती है और उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन के विकास में इस संप्रदाय के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित करती है।
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