इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“रस मंजरी” महाकवि भानुदत्त द्वारा रचित संस्कृत काव्यशास्त्र का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जो मुख्य रूप से श्रृंगार रस और नायिका-भेद पर केंद्रित है। इस कृति में, कवि ने प्रेम और सौंदर्य के विभिन्न पहलुओं को अत्यंत सूक्ष्मता से विश्लेषित किया है। इसमें नायक-नायिकाओं के प्रकार, उनकी विभिन्न अवस्थाओं (जैसे- पूर्वानुराग, मान, विरह) और उनके मनोवैज्ञानिक हाव-भावों का विस्तृत और काव्यात्मक वर्गीकरण प्रस्तुत किया गया है। अपनी सरल भाषा और स्पष्ट उदाहरणों के कारण, यह ग्रंथ काव्यशास्त्र के विद्यार्थियों और कवियों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ। यह रीतिकाल के हिंदी साहित्य और भारतीय चित्रकला को भी गहराई से प्रभावित करता है।
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