इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
रतन हजारा’ संभवतः ब्रजभाषा साहित्य का एक काव्य-ग्रंथ है, जिसका श्रेय रसनिधि नामक कवि को दिया जाता है। जैसा कि नाम से प्रतीत होता है (‘हजारा’ यानी हजार), इसमें लगभग एक हजार दोहे या छंद हो सकते हैं। यह कृति मुख्य रूप से शृंगार रस, विशेषकर नायिका-भेद और प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं, पर केंद्रित हो सकती है, जो रीतिकाल की एक प्रमुख काव्य-प्रवृत्ति थी। इसके अतिरिक्त, इसमें नीति और भक्ति से संबंधित दोहे भी शामिल हो सकते हैं। यह रीतिकालीन काव्य परंपरा का एक प्रतिनिधि उदाहरण है।
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