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रत्नावली नाटिका तृतीय संस्करण - Rathnavali Natika third edition - Book
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रत्नावली नाटिका तृतीय संस्करण – Rathnavali Natika third edition – Book

इस पुस्तक के विषय

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पुस्तक सार

“रत्नावली” 7वीं शताब्दी के सम्राट हर्षवर्धन द्वारा रचित एक प्रसिद्ध संस्कृत ‘नाटिका’ है। नाटिका, नाटक का ही एक छोटा और ललित रूप होता है जिसमें श्रृंगार रस की प्रधानता होती है। यह कहानी राजा उदयन और सागरिका (जो वास्तव में सिंहल की राजकुमारी रत्नावली है) की प्रेम कथा पर आधारित है। इसमें रानी वासवदत्ता की ईर्ष्या, विदूषक का हास्य, और कई मनोरंजक घटनाओं के बाद अंत में नायक-नायिका का सुखद मिलन होता है। यह तीसरा संस्करण दर्शाता है कि यह कृति पाठकों और अध्येताओं के बीच निरंतर लोकप्रिय रही है। यह अपनी सुगठित कथावस्तु और मनोरंजक प्रस्तुति के लिए जानी जाती है।

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