इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“रतिमन्मथनाटकम्” का अर्थ है “रति और मन्मथ (कामदेव) पर आधारित नाटक”। यह एक संस्कृत श्रृंगारिक नाटक है, जिसकी कथा प्रेम के देवता कामदेव और उनकी पत्नी रति के इर्द-गिर्द घूमती है। नाटक का कथानक संभवतः उस पौराणिक कथा पर आधारित हो सकता है जहाँ भगवान शिव अपने तीसरे नेत्र से कामदेव को भस्म कर देते हैं, और फिर रति के विलाप और तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पुनः जीवन-दान देते हैं। इस नाटक में श्रृंगार और करुण रस की प्रधानता होगी और इसमें प्रेम की विभिन्न अवस्थाओं, विरह की पीड़ा और पुनर्मिलन के आनंद का सुंदर काव्यात्मक चित्रण किया गया होगा।
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