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रत्नकरंडक श्रावकाचार - Ratnakarandaka Shravkachar - Book
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रत्नकरंडक श्रावकाचार – Ratnakarandaka Shravkachar – Book

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पुस्तक विवरण

रत्नकरण्डक श्रावकाचार’ आचार्य समंतभद्र द्वारा रचित जैन श्रावकों (गृहस्थों) के आचार-नियमों पर एक अत्यंत प्रामाणिक और महत्वपूर्ण ग्रंथ है। इसमें सम्यक् दर्शन, ज्ञान और चारित्र (त्रिरत्न) को ‘रत्नों का पिटारा’ (रत्नकरण्डक) कहा गया है। यह ग्रंथ विस्तार से बताता है कि एक गृहस्थ को इन तीन रत्नों को अपने जीवन में कैसे धारण करना चाहिए। यह जैन धर्म में श्रावक के आदर्श जीवन का एक मानक ग्रंथ माना जाता है, जो आज भी प्रासंगिक है।

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