इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक साहित्यिक शोध-प्रबंध है जो हिंदी साहित्य के ‘रीतिकाल’ के एक कवि ‘करन’ के काव्य का ‘समीक्षात्मक अध्ययन’ प्रस्तुत करता है। इसमें कवि करन के जीवन, उनकी प्रमुख रचनाओं, और उनकी काव्य-शैली का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। यह शोध उनकी कविता में रस, अलंकार, और छंद योजना के साथ-साथ उस समय के साहित्यिक और सामाजिक संदर्भ में उनके योगदान का मूल्यांकन करता है। यह रीतिकाल के एक अल्प-ज्ञात कवि पर महत्वपूर्ण प्रकाश डालता है।
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