इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह ग्रंथ हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्रतम ग्रंथ “ऋग्वेद” की मूल संहिता का दूसरा भाग है। ऋग्वेद-संहिता में विभिन्न देवताओं (जैसे- अग्नि, इंद्र, सोम, उषा) की स्तुति में रचे गए 1028 सूक्तों (भजनों) का संग्रह है, जिन्हें दस ‘मंडलों’ में विभाजित किया गया है। यह दूसरा भाग संभवतः ऋग्वेद के कुछ विशिष्ट मंडलों को प्रस्तुत करता है। इसमें मूल संस्कृत मंत्रों को उनके सही वैदिक स्वरों और उच्चारण के साथ दिया गया होगा। यह प्राचीन भारतीय धर्म, mitología (पौराणिक कथाओं), दर्शन और समाज को उसके मूल स्रोत से समझने के लिए एक अनिवार्य और आधारभूत ग्रंथ है, जो विद्वानों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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