इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
महाकवि धनपाल द्वारा रचित ‘ऋषभपंचाशिका’ जैन भक्ति साहित्य का एक महत्वपूर्ण स्तोत्र है, जो प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव को समर्पित है। यह कृति पचास (पंचाशिका) प्राकृत श्लोकों में भगवान ऋषभदेव के गुणों, उनके जीवन और उनके प्रति गहरी भक्ति को व्यक्त करती है। इसका काव्यात्मक सौंदर्य और आध्यात्मिक गहराई इसे विशेष बनाती है। यह संस्करण मूल प्राकृत स्तोत्र को गुजराती भाषा की टीका या अनुवाद के साथ प्रस्तुत करता है, जिससे गुजराती भाषी पाठक भी इस प्राचीन और पवित्र स्तोत्र के अर्थ और भाव को आसानी से समझ सकें और उससे आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर सकें।
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