इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“रुद्रयामल तंत्र” हिंदू तंत्र-शास्त्र की यामल परंपरा का एक महत्वपूर्ण और बृहद् ग्रंथ है। ‘यामल’ का अर्थ है ‘युगल’, और ये ग्रंथ शिव और शक्ति के बीच संवाद के रूप में प्रस्तुत किए जाते हैं। रुद्रयामल तंत्र मुख्य रूप से भैरव और भैरवी (काली) की उपासना पर केंद्रित है, लेकिन इसमें विषयों की एक विशाल श्रृंखला शामिल है। इसमें कुंडलिनी योग, चक्र, मंत्र-विज्ञान, यंत्र-निर्माण, और विभिन्न प्रकार की तांत्रिक साधनाओं का विस्तृत और गूढ़ वर्णन है। इसे आगम-निगम परंपरा का एक विश्वकोश माना जाता है और यह वामाचार तथा दक्षिणाचार दोनों मार्गों की साधनाओं पर प्रकाश डालता है। यह तंत्र के गंभीर अध्येताओं के लिए एक मौलिक कृति है।
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