इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह पंडित आशाधर जी द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण और व्यापक जैन ग्रंथ है, जो विशेष रूप से श्रावकों (गृहस्थों) के धर्म और कर्तव्यों का वर्णन करता है। ‘धर्म का अमृत-सागर’ नामक यह ग्रंथ जैन गृहस्थ के लिए सम्यक्त्व, अणुव्रत, और दैनिक क्रियाओं से लेकर सल्लेखना (शांतिपूर्ण मृत्यु) तक के सभी पहलुओं पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करता है। इसे श्रावकाचार के सबसे प्रामाणिक और विस्तृत ग्रंथों में से एक माना जाता है।
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