इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
साहित्य दर्पण’ चौदहवीं शताब्दी के आचार्य विश्वनाथ कविराज द्वारा रचित संस्कृत काव्यशास्त्र का एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और व्यापक ग्रंथ है। यह कृति काव्य के सभी पहलुओं का विस्तृत विवेचन करती है, लेकिन यह अपनी प्रसिद्ध काव्य परिभाषा “वाक्यं रसात्मकं काव्यम्” (रस से युक्त वाक्य ही काव्य है) के लिए विशेष रूप से जानी जाती है। विश्वनाथ ने रस को काव्य की आत्मा के रूप में स्थापित किया और ध्वनि सिद्धांत सहित अन्य काव्यशास्त्रीय मतों का खंडन करते हुए अपने सिद्धांत को तर्कपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। यह संस्कृत काव्यशास्त्र का एक मानक ग्रंथ है।
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