इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह आचार्य रजनीश (ओशो) की सबसे प्रसिद्ध और विवादास्पद पुस्तकों में से एक है। इस ग्रंथ में, ओशो यौन-ऊर्जा (‘सम्भोग’) को एक दमित या पापपूर्ण वृत्ति के रूप में देखने की पारंपरिक धारणा को चुनौती देते हैं। वे तर्क देते हैं कि काम-ऊर्जा जीवन की सबसे मौलिक और शक्तिशाली ऊर्जा है, और इसका दमन करने से विकृतियाँ पैदा होती हैं। इसके बजाय, वे जागरूकता और ध्यान के माध्यम से इस ऊर्जा के रूपांतरण का मार्ग सुझाते हैं, जिससे वही ऊर्जा ऊर्ध्वगामी होकर ‘समाधि’ या परम-चैतन्य की अवस्था तक ले जा सकती है। यह अध्यात्म पर एक क्रांतिकारी और आधुनिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
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