इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
समीचीन जैन धर्म’ शीर्षक वाली यह कृति जैन धर्म के सिद्धांतों, दर्शन और आचार संहिता का एक प्रामाणिक और सुसंगत (‘समीचीन’) परिचय प्रस्तुत करती है। इसमें संभवतः जैन धर्म के मूल तत्त्वों, जैसे त्रिरत्न (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान, सम्यक् चारित्र), पंच महाव्रत (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह), और अनेकांतवाद तथा स्याद्वाद के दार्शनिक सिद्धांतों की स्पष्ट व्याख्या की गई होगी। इसका उद्देश्य जैन धर्म के बारे में भ्रांतियों को दूर करना और पाठकों को उसके वास्तविक और तार्किक स्वरूप से परिचित कराना है।
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