इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह ‘सम्पूर्ण गांधी वाङ्मय’ का बासठवाँ खंड है, जिसमें महात्मा गांधी के लेखों, पत्रों और भाषणों का संग्रह है। यह खंड 1936 के अंत की अवधि को कवर करता है। इस समय गांधीजी वर्धा में अपने सेवाग्राम आश्रम की स्थापना में व्यस्त थे और ग्रामोद्योग तथा ग्रामीण पुनर्निर्माण के कार्यों पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। इसमें उनके ‘हरिजन’ में लिखे गए लेख और उनके रचनात्मक कार्यक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण पत्राचार शामिल हैं।
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