इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
संचेतना’ एक साहित्यिक पत्रिका है जो समकालीन हिंदी साहित्य, विशेषकर कहानी और कविता, पर केंद्रित है। सितंबर 1980 का यह अंक उस दौर की साहित्यिक प्रवृत्तियों और सामाजिक सरोकारों को दर्शाता है। 1980 का दशक हिंदी साहित्य में मोहभंग और नए विमर्शों का समय था। इस अंक में उस समय के प्रमुख और उदीयमान लेखकों की रचनाएँ, साहित्यिक कृतियों की समीक्षाएँ, और समकालीन मुद्दों पर वैचारिक लेख शामिल हो सकते हैं। यह हिंदी साहित्य के इतिहास के उस विशिष्ट कालखंड का अध्ययन करने के लिए एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ है।
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