इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
यह ग्रंथ संस्कृत साहित्य में विश्वकोश या विश्वकोशीय परंपरा पर एक शोधपरक या विवरणात्मक कृति है। इसका शीर्षक “संस्कृत साहित्य में विश्वकोश” है, जो यह दर्शाता है कि इसमें प्राचीन भारत में ज्ञान को संकलित करने की पद्धतियों का अध्ययन किया गया है। पुस्तक में उन ग्रंथों की चर्चा हो सकती है जो अपने स्वभाव में विश्वकोशीय थे, जैसे- पुराण, कुछ स्मृतियाँ, या ‘मानसोल्लास’ जैसे ग्रंथ, जिनमें विभिन्न कलाओं, विज्ञानों और विषयों का संग्रह मिलता है। यह संस्कृत साहित्य की समृद्धि और प्राचीन भारतीय विद्वानों की ज्ञान को व्यवस्थित और संग्रहित करने की अद्भुत क्षमता को उजागर करती है। यह संस्कृत के अध्येताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।
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