इस पुस्तक के विषय
पुस्तक सार
“संस्कृतवाङ्मयवल्लरी” का अर्थ है “संस्कृत साहित्य रूपी लता”। यह एक ऐसी पुस्तक है जिसमें संस्कृत साहित्य के विभिन्न अंगों को एक लता की शाखाओं की तरह प्रस्तुत किया गया है। यह संभवतः संस्कृत साहित्य के चुने हुए अंशों का एक संग्रह (anthology) है, जिसमें वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, और कालिदास तथा भवभूति जैसे कवियों की रचनाओं से सुंदर और प्रतिनिधि उदाहरण संकलित किए गए हों। इसका उद्देश्य पाठकों को संस्कृत साहित्य की विशाल और विविध परंपरा की एक झलक दिखाना और उसकी काव्य-सुषमा तथा ज्ञान-गरिमा से परिचित कराना है। यह संस्कृत साहित्य में प्रवेश करने के लिए एक सुंदर और सुव्यवस्थित मार्गदर्शिका है।
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