इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
यह एक गहन तांत्रिक और यौगिक ग्रंथ है जो मानव शरीर में मौजूद ऊर्जा केंद्रों, जिन्हें ‘चक्र’ कहा जाता है, का विस्तृत वर्णन करता है। ‘षट्चक्रनिरूपण’ कुंडलिनी योग के अभ्यास के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शिका है, जिसमें मूलाधार से सहस्रार तक छह मुख्य चक्रों के ध्यान और जागरण की प्रक्रिया को समझाया गया है। यह तंत्र और योग के उन्नत साधकों के लिए एक मौलिक कृति है, जो आध्यात्मिक ऊर्जा को जागृत कर आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं। यह ग्रंथ शरीर और चेतना के गूढ़ रहस्यों को उजागर करता है।
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