इस पुस्तक के विषय
पुस्तक विवरण
सत्यार्थ-दर्पण’ का अर्थ है ‘सत्य के अर्थ का दर्पण’। यह पुस्तक महर्षि दयानंद सरस्वती के प्रसिद्ध ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पर एक टीका, समीक्षा या उसका सरलीकरण हो सकती है। यह ‘सत्यार्थ प्रकाश’ में प्रस्तुत किए गए तर्कों और विचारों को एक ‘दर्पण’ की तरह स्पष्ट रूप से प्रतिबिंबित करने का प्रयास करती है, ताकि पाठक उसके मूल संदेश, जैसे कि वेदों की सर्वोच्चता, मूर्तिपूजा का खंडन, और सामाजिक सुधारों को आसानी से समझ सकें।
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